चेफ़र गुबरैला

बाजरा

चेफ़र गुबरैला

Chiloloba acuta

कीट

संक्षेप में

  • हरे धात्विक चमक लिए गुबरैले अनाज के फूलों को खाते हुए देखे जाते हैं।
  • फूलों को होने वाली क्षति अनाज बनने कि प्रक्रिया में नुकसान पहुंचाती है।
  • उत्पन्न कीटमल बौरों को बेरंग कर सकता है।
  • ज़रूरत पड़ने पर वे कलियों एवं पात्तियों पर भी आक्रमण कर सकते हैं।

में भी पाया जा सकता है


चेफ़र गुबरैला

बाजरा

लक्षण

दक्षिण भारत में, धात्विक हरा गुबरैला चिलोलोबा एक्यूटा आमतौर पर पूर्वोत्तर मानसून के बाद की घास पर पाया जाता है। हालांकि, ये अक़्सर परागकणों की खोज हेतु कभी-कभी मोती बाजरा, मक्का और ज्वार को भी खाता है (इसलिए इसे अपने दूसरे सामान्य नाम, पोलन बीटल या परागकण गुबरैले के नाम से भी जाना जाता है)। खाते समय, यह फूलों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अनाज बनने की प्रक्रिया को क्षति होती है। उत्पन्न कीटमल बौरों को बेरंग कर सकता है। हालांकि, उन्हें पराग-भक्षण एवं पुष्प-भक्षण कीट माना जाता है, लेकिन ज़रूरत पढ़ने पर वे कलियों एवं पत्तियों पर भी हमला कर सकते हैं। लार्वा ढीले, सड़ते हुए जैविक पदार्थ पर पाए जाते हैं तथा उन्हें कीट नहीं माना जाता है।

सिफारिशें

जैविक नियंत्रण

चेफ़र गुबरैले के बड़े लार्वा, हेटेरोहेबडिटिस बैक्टीरियोफ़ोरा एवं कुछ स्टेनरनेमा प्रजाति (एस. सियामकयाई, एस. थर्मोफ़िलम व एस. अब्बासी) के सूत्रकृमि रोगजनक की मध्यम या उच्च खुराक के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। कवक की कुछ प्रजातियां, जैसे कि मेटारहिज़ियम ऐनीसोप्ले, कीटों को नियंत्रित करने में प्रभावकारी नियंत्रक साबित हो सकती हैं। पता लगाएँ कि क्या इन सूत्रकृमि पर आधारित उत्पाद आपके क्षेत्र में उपलब्ध हैं या नहीं। नीम की बट्टी के साथ मिट्टी का उपचार भी कीटों को भोजन करने से रोक सकता है तथा कीटों के आकार को कम कर सकता है।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो निवारक उपायों और जैविक उपचारों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। व्यस्क कीटों को निशाना बनाने हेतु कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है।

यह किससे हुआ

नुकसान चेफ़र गुबरैले, चिलोलोबा एक्यूटा द्वारा होता है। यह एक ऐसा कीड़ा है जो भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से मौजूद है। व्यस्क कीट आमतौर पर चमकदार धात्विक हरे रंग के होते हैं, लेकिन कुछ नस्लों में लाल या गहरे नीले रंग के अंतर देखने को मिल सकते हैं। वे अनियमित रूप से बालों के गुच्छों से ढके होते हैं, विशेष रूप से शरीर के किनारों एवं नीचे की ओर। मादाएं निचली मिट्टी, पत्तियों या सड़ी लकड़ी में मलाई जैसे सफ़ेद अंडे देती हैं। लार्वा C के आकार के होते हैं तथा मिट्टी के जैविक पदार्थों (तनों, टहनियों या डालियों) को खाते हैं। व्यस्क कीटों को आमतौर पर दक्षिणी भारत में पूर्वोत्तर मानसून के बाद घास पर देखा जाता है। वे कभी-कभार मोती बाजरा, मक्का एवं ज्वार को भी खाते हैं एवं फूलों तथा अनाज को क्षति पहुँचाते हैं।


निवारक उपाय

  • चेफ़र गुबरैलों या फूलों पर नुकसान के संकेतों के लिए खेतों की नियमित रूप से निगरानी करें।
  • यदि उपलब्ध हो, तो नेट की मदद से गुबरैलों को झाड़कर एकत्र करें।

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