कॉफ़ी बेरी रोग

कॉफ़ी

कॉफ़ी बेरी रोग

Colletotrichum kahawae

फफूंद

संक्षेप में

  • बेरियों के ऊपरी हिस्सों में छोटे-छोटे छेद।
  • हरी बेरियों में गहरे धंसे हुए घाव।
  • बेर सूख जाते हैं और समय से पहले पेड़ से गिर जाते हैं।

में भी पाया जा सकता है

1 फसलें
कॉफ़ी

कॉफ़ी बेरी रोग

कॉफ़ी

लक्षण

बेरियों पर गहरे धँसे हुए घाव बन जाते हैं, जिससे वे समय से पहले सूखकर गिर जाती हैं। कभी-कभी इसका असर पत्तियों पर भी पड़ता है। रोग पौधे के विकास के सभी चरणों को प्रभावित करता है। संक्रमण फूल आने की अवस्था से शुरू हो सकता है, लेकिन लक्षण केवल हरी और पकी हुई बेरियों पर ही दिखते हैं।

सिफारिशें

जैविक नियंत्रण

प्रतिरोधी किस्में लगाएं।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा निवारक उपायों और उपलब्ध जैविक उपचारों के मिलेजुले दृष्टिकोण पर विचार करें। फूल आने पर पहला छिड़काव करें। सुरक्षा के लिए कॉपर युक्त कवकनाशी का महीने में दो बार छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आपने निवारक उपचार लागू नहीं किए हैं, तो प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर कदम उठाएं।

यह किससे हुआ

नुकसान का कारण कवक, कोलेटोट्रिकम कहावे, है। यह बारिश की छींटों, कॉफ़ी तोड़ने वालों, पक्षियों और संक्रमित अंकुरों के लाने ले-जाने से फैलता है। यह एक गंभीर रोग है, जो पैदावार को 80% तक कम कर सकता है।


निवारक उपाय

  • स्वच्छ तरीके से और समय पर तुड़ाई करें।
  • किस्मों के आधार पर पौधों के बीच अनुशंसित दूरी बनाए रखें।
  • मौसम के अलावा निकलने वाली बेरियों और पिछली फसल के कचरे को हटा दें।
  • रोग के फैलाव को रोकने के लिए पानी जमा न होने दें।
  • पुरानी टहनियाँ हटाएं, रोगग्रस्त बेरियों को तोड़ दें या रोग के स्रोत को कम करें।
  • पत्तियों में हवा की आवाजाही को सुधारने के लिए कॉफ़ी के पेड़ों की छंटाई करें।

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