Colletotrichum kahawae
फफूंद
बेरियों पर गहरे धँसे हुए घाव बन जाते हैं, जिससे वे समय से पहले सूखकर गिर जाती हैं। कभी-कभी इसका असर पत्तियों पर भी पड़ता है। रोग पौधे के विकास के सभी चरणों को प्रभावित करता है। संक्रमण फूल आने की अवस्था से शुरू हो सकता है, लेकिन लक्षण केवल हरी और पकी हुई बेरियों पर ही दिखते हैं।
प्रतिरोधी किस्में लगाएं।
हमेशा निवारक उपायों और उपलब्ध जैविक उपचारों के मिलेजुले दृष्टिकोण पर विचार करें। फूल आने पर पहला छिड़काव करें। सुरक्षा के लिए कॉपर युक्त कवकनाशी का महीने में दो बार छिड़काव करने से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आपने निवारक उपचार लागू नहीं किए हैं, तो प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर कदम उठाएं।
नुकसान का कारण कवक, कोलेटोट्रिकम कहावे, है। यह बारिश की छींटों, कॉफ़ी तोड़ने वालों, पक्षियों और संक्रमित अंकुरों के लाने ले-जाने से फैलता है। यह एक गंभीर रोग है, जो पैदावार को 80% तक कम कर सकता है।