सल्फ़र की कमी

अन्य

सल्फ़र की कमी

Sulfur Deficiency

कमी

संक्षेप में

  • नई पत्तियों पर असर।
  • पत्तियों का छोटा आकार।
  • पत्तियों का बदरंग होना: फीका हरा - पीला हरा - पीला।
  • पतले बैंगनी रंग के तने।
  • विकास का रुक जाना।

में भी पाया जा सकता है

58 फसलें
बादाम
सेब
खुबानी
केला
और अधिक

सल्फ़र की कमी

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लक्षण

सल्फ़र की कमी से प्रभावित पत्तियां पहले अक्सर हल्की हरी होती हैं, बाद में पीली-हरी और फिर पूरी तरह पीली हो जाती हैं, जिसके साथ अक्सर तना बैंगनी रंग का हो जाता है। ये लक्षण नाइट्रोजन की कमी से प्रभावित पौधों में भी पाए जाते हैं, इसलिए आसानी से गलतफ़हमी हो सकती है। लेकिन, सल्फ़र की कमी में ये पहले नई ऊपर की पत्तियों में दिखाई देते हैं। कुछ फ़सलों (जैसे, गेहूँ और आलू) में, इसकी बजाय अन्तःशिरा पर्ण हरित हीनता (क्लोरोसिस) या पत्तियों की सतह पर धब्बे देखे जा सकते हैं। आम तौर पर पत्तियाँ छोटी और पतली हो जाती हैं और नोक पर परिगलन भी हो सकता है। खेतों में प्रभावित क्षेत्र दूर से हल्के हरे या चमकीले पीले दिखाई देते हैं। तने अवरुद्ध लम्बवत विकास के साथ पतले होते जाते हैं। यदि ये कमी मौसम के आरम्भ में होती है, तो पौधों में अवरुद्ध विकास, फूल खिलने में विकृति और फलों/दानों के पकने में देरी होती है। रोपाई के बाद, सल्फ़र की कमी वाली मिट्टी में उगने वाले पौधों की मृत्यु दर सामान्य से अधिक होती है।

सिफारिशें

जैविक नियंत्रण

जानवरों की खाद तथा पत्तियों का कम्पोस्ट मिश्रण या पौधों की पलवार पौधों को जैविक पदार्थ तथा सल्फ़र और बोरोन जैसे पोषक तत्वों को प्रदान करने के लिए आदर्श हैं। सल्फ़र कमी के उपचार के लिए यह दीर्घकालीन उपाय है।

रासायनिक नियंत्रण

  • सल्फ़र (S) युक्त उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • उदाहरण: पत्तियों पर छिड़काव के लिए सल्फ़र 90% WDG
  • अपनी मिट्टी और फसल के लिए सबसे अच्छे उत्पाद और खुराक के बारे में जानने के लिए अपने कृषि सलाहकार से परामर्श करें।

अतिरिक्त सिफ़ारिशें:

  • अपने फसल उत्पादन को बेहतर से बेहतर करने के लिए फसल के मौसम की शुरुआत से पहले मिट्टी की जाँच करने की सलाह दी जाती है।
  • रोपण से पहले सल्फ़र डाला जाए, तो बेहतर रहता है।
  • अगर आपकी मिट्टी का पीएच बहुत ज़्यादा है, तो अपनी फसल की सल्फर ग्रहण करने की क्षमता में मदद के लिए सिट्रिक एसिड लगाएं।

यह किससे हुआ

सल्फ़र की कमी प्रकृति या कृषि में आम नहीं है। सल्फ़र मिट्टी में चलायमान होता है और यह आसानी से पानी के माध्यम से मिट्टी से नीचे की ओर बह सकता है। यही कारण है कि न्यूनता कम जैविक पदार्थ वाली, मौसम से ख़राब हुई, बलुही या उच्च पीएच वाली मिट्टी में पाई जाती है। मिट्टी में अधिकांश सल्फ़र मिट्टी के जैविक पदार्थों में या मिट्टी के खनिजों से जुड़ी रहती है। मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया इसे खनिजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा पौधों को उपलब्ध कराते हैं। उच्च तापमान इस प्रक्रिया में सहायक होता है क्योंकि ये इन सूक्ष्मजीवियों की गतिविधियों तथा संख्या को बढ़ाने के लिए अनुकूल होता है। यह पौधों में चलायमान नहीं होता है और आसानी से पुरानी पत्तियों से नई पत्तियों में स्थानांतरित नहीं होता है। इसलिए, न्यूनता पहले नई पत्तियों में दिखाई देती है।


निवारक उपाय

  • पौधशाला में बीजों की क्यारियों में उर्वरकों की सहायता से सल्फ़र डालें।
  • भूसे को पूरी तरह हटाने या जलाने की बजाय इसे मिट्टी में मिलाएं।
  • सल्फ़र को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाने के लिए फ़सल कटने के बाद सूखी जुताई कर मिट्टी की स्थिति को बेहतर करें।

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